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कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न :

यौन उत्पीड़न क्या है ?

विशाखा बनाम राजस्थान राज्य में सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्दॆश में दी गयी परिभाषा के अनुसार " यौन भावना से संचालित महिला की इच्छा के विरूध्द किए गए व्यवहार को यौन प्रताड़ता माना जाएगा " जैसे –

  • शारीरिक स्पर्श तथा कामोद्दीप्त चेष्टाएं ।
  • यौन-स्वीकृति की मांग अथवा प्रार्थना ।
  • काम वासना से प्रेरित टीका टिप्पणी ।
  • किसी कामोत्तेजक कार्य-व्यवहार / सामग्री का प्रदर्शन |
  • महिला की इच्छा के विरूध्द यौन संबंधी कोई भी अन्य शारीरिक, मौखिक या अमौखिक आचरण ।
  • सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश(१९९७) सभी कार्य स्थलों, दोनॊं सार्वजनिक व निजी, पर कानूनी तौर से लागू है । इनमें कर्म्चारियॊं व नियोक्ताओं की जिम्मेदारियां दी गई है और यह कानूनी तौर से लागू हो सकती है । कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को -

  • 1. केन्द्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम , 1964
  • 2. औधोगिक रोजगार (स्थाई आदेश) अधिनियम, 1946 में दुर्व्यवहार माना गया है ।
  • सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देश के अनुसार शिकायत निवारण प्रक्रिया –

  • कार्यस्थल पर औंरतों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित कर्ने के लियॆ उन्हॆं समुचित कार्य स्थिति प्रदान की जानी चाहिए ।
  • सभी कार्यस्थलॊं मॆं समुचित शिकायत प्रक्रिया होनी चाहिए ।
    • एक शिकायत कमेटी ।
    • एक विशेष परामर्शदाता ।
    • अन्य सहायता सेवाएं ।
  • शिकायत कमेटी -
    • की मुखिया एक महिला होनी चाहिए और कम से कम 50 प्रतिशत सदस्य महिलाएं होनी चाहिए ।
  • गैर सरकारी संगठन या संस्थान के प्रतिनिधि या एक व्यक्ति जो यौन उत्पीड़न की समस्या से परिचित हो ।
  • शिकायात प्रकिया समयबध्द होनी चाहिए ।
  • कमेटी को अपने समक्ष आई शिकायतों और सिलसिले में उठाए गए कदमों की वार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए ।
  • यौन उत्पीड़न की शिकायतकर्ता को दोषी व्यक्ति या अपने तबादले का विकल्प मिलना चाहिए । यौन उत्पीड़न का शिकार कौन हो सकता है ?
  • कोई भी जिसमें सम्मिलित हो सकते है :

  • कार्यस्थल में एक व्यक्ति,
  • एक कर्मचारी-जमादार से मुख्य कार्यकारी अधिकारी तक,
  • एक गैर कर्मचारी किसी भी हैसियत में – विधार्थी, घरबारी, स्वयंसेवक, मानदया, नौकरानी,सा सलाहाकार,
  • कोई भी कपड़ा पहनने वाली,
  • सार्वजनिक उपक्रम या निजी उपक्रम या गैर सरकारी संस्थानॊं में काम करनॆ वाली,
  • असंगठित संस्था में कार्य करती हों – बड़ा या छोटा,
  • एक व्यक्ति जो सोचता है कि यह सिर्फ दूसरॊं के साथ होता है ।
  • यौन उत्पीड़न के प्रभाव : -

  • शारीरिक, भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परेशानी ।
  • आत्म सम्मान खोना ।
  • गैर हाजरी ।
  • उत्पादकता घटना
  • आत्महत्या
  • पारिवारिक जीवन पर उसका असर ।
  • नौकरी छुटना, पदोन्नति का कार्य संबंधित जैसे प्रशिक्षण
  • नियोक्ता की जिम्मेदारियां :-

    यौन उत्पीड़न को गंभीर अपराध के रूप में स्वीकार करॆं और उसे नियम और नियंत्रण मॆं लागू करें । कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोके और सजा दें ।

    यौन उत्पीड़न विरोधी जागरूकता प्रशिक्षण करें स्थाई व ठेका कर्मचारियों के लिए तथा नए कर्मचारियों के लिए ।

    यौन उत्पीड़न विरोधी नीति तैयार करॆं, जिसमॆं :

  • खुद को दोषी न मानें ।
  • यौन उत्पीड़न को अनदेखा न करें, यह स्वयं समाप्त न होगा ।
  • यौन उत्पीड़न की प्रकृति को पहचानें ।
  • उत्पीड़अक से बाते करें ।
  • यौन उत्पीड़न के बारे मॆं कार्यस्थल पर अन्य व्यक्तियों से या अपने परिवार के सदस्यॊं से बाते करें ।
  • यौन उत्पीड़न की एक विस्तत और घटनाक्रमानुसार लेखा-जोखा रखे ।
  • यौन उत्पीड़न की घटना का एक गबाह बनाने की कोशिश करॆं ।
  • उत्पीड़क को चिट्ठी लिखॆं या अपने कार्यस्थल के यौन उत्पीड़न विरोधी नीति को रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजें ।
  • सुनिश्चित करॆं कि नियोक्ता एक समुचित यौन उत्पीड़न नीति तैयार करॆं और एक निवारण प्रक्रिया बनाएं ।
  • निरंतर जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण कराए जाने की मांग करॆं ।
  • किसी महिला संस्था के पास जाएं ।
  • बिना देरी किए औपचारिक शिकयत दर्ज कराएं ।
  • अगर जरूरत हो तो परामर्श लें ।